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मंदिर विषयक


    झाबुआ शहर के मध्य भाग में स्थित गोपाल मंदिर जिले भर में अपनी अलग पहचान बनाये हैं. वैसे तो शहर मैं सेकडो मंदिर हैं पर गोपाल मंदिर शायद अपने अलग अस्तित्व एवं प्राचीन स्म्रतियो के कारण शायद यहाँ के लोगो को और अन्यत्र निवासरत लोगो को अपनी और आकर्षित करता हैं. माँ गोपाल अपने पुरे परिवार के साथ यहाँ पर विराजित हैं मंदिर प्रांगन मैं समय समय पर विभिन् आयोज़न किये जाते हैं जिनमे प्रमुख वार्षिक उत्सव, गुरु पूर्णिमा आदि हैं. यहाँ पर विभिन् उत्सव जैसे राम नवमी,कृष्ण जन्माष्टमी,गणेश चथुर्ति आदि को भी भव्य रूप मैं मनाया जाता हैं. 
       गोपाल मंदिर का वार्षिक उत्सव प्रति वर्ष मई माह मैं मनाया जाता हैं उत्सव चार दिन का होता हैं जिसमे पुरे मंदिर पर आकर्षक साज़ सज्जा की जाती हैं गोपाल मंदिर झाबुआ के आलावा जन्त्राल , भरूच, महू और इंदौर मैं भी हैं गुरु पूर्णिमा के अवसर पर इन जगहों पर भी भव्य आयोज़न किये जाते हैं. झाबुआ स्थित गोपाल मंदिर मैं कार्य समिति के देखरेख मैं विभिन् संस्थाए भी संचालित की जाती हैं जिनमे श्री गोपाल वाचनालय, श्री गोपाल शिशु विद्या मंदिर आदि हैं. वाचनालय मैं धार्मिक, संस्कृतिक, साहित्यिक जैसे कुल २०००० हज़ार पुस्तकों का संग्रह हैं. विद्यालय मैं कक्षा १ से ५ तक कक्षाए आयोजीत की जाती हैं जिनका अधिपत्य एवं सञ्चालन मंदिर कार्यसमिति द्वारा किया जाता हैं. मंदिर मैं प्रातकाल मैं ९:३० बजे आरती की जाती हैं एवं सांयकाल मैं ८ से ९ भजन संध्या आयोजीत की जाती हैं विभिन् उत्सव के दोरान मंदिर मैं विशाल भंडारे का अयोज़ं किया जाता हैं जो मंदिर प्रांगन मैं होता हैं. 
        गोपाल मंदिर का निर्माण आज से करीब 40 वर्ष पूर्व हुआ था तब यह स्थान पूरी तरह रिक्त था तथा मंदिर निर्माण के पश्चात् यहाँ कालोनी का निर्माण किया गया जिसे गोपाल कालोनी का नाम दिया गया। मंदिर में हाल ही में अपना निर्माण के ४० वर्ष पूरे किये है तथा अभी मई माह में वार्षिक उत्सव के रूप में मंदिर में भव्य आयोजन किया गया जिसमे विभिन स्थानों से हजारो भक्तो ने अपनी उपस्थिति दर्ज करा कर कार्यक्रम को सफल बनाया !
         गोपाल मंदिर झाबुआ शहर के मध्य भाग में स्थित है ! गोपाल मंदिर से दाहोद शहर की दुरी मात्र 75 कि.मी है व इंदौर शहर से दुरी मात्र 150 कि.मी है। ujjain शहर से भी दुरी अधिक नहीं है । इसके अलावा मध्य बिंदु में स्थित होने के कारण अन्य स्थानो से गोपाल मंदिर की दुरी अधिक नही है।गोपाल मंदिर के पास में ही कई छोटे छोटे गॉव है जिनमें रानापुर, थांदला , जोबट, मेघनेगर आदि है जो गोपाल मंदिर से कुछ ही कि.मी की दुरी पर है । इनमें मेघनगर जो कि गोपाल मंदिर से मात्र 15 कि.मी की दुरी पर स्थित है वहॉ पर रेल्वे स्टेशन की सुविधा भी है अन्यत्र स्थानो से आने वाले लोगो के लिए जो रेल मार्ग से गोपाल मंदिर तक पहुचना चाहते है वे सीधे ही रेल मार्ग से मेघनगर आकर यहॉ से उपयुक्त व्यवस्था बस जीप आदि व्यवस्था कर बिना किसी परेशानी के गोपाल मंदिर तक पहुच सकते है।

इतिहास


गोपाल मंदिर झाबुआ का निर्माण वर्ष 1970 में हुआ. मंदिर निर्माण पश्चात् मंदिर सुचारू रूप से चलाने हेतु सर्वसमिति से गोपाल मंदिर ट्रस्ट का गठन किया गया. गोपाल मंदिर के निर्माण में भक्त मंडल व ट्रस्ट के सभी सदस्यों के साथ ही ट्रस्ट में संरक्षक एवं वरिष्ट ट्रस्टी श्री विश्वनाथजी त्रिवेदी मोटा भाई की महत्वपूर्ण भूमिका रही. पं पूज्य श्री विश्वनाथ जी त्रिवेदी (मोटा भाई ) का जन्म मध्य भारत के सुदूर पश्चिम शेत्र में स्थित झाबुआ में श्री ललिता शंकर जी त्रिवेदी के सामान्य ब्राह्मन परिवार में १०-०९-१९१८ को हुआ था। 
       श्री मोटा भाई बचपन से ही गंभीर एवं चिन्तनशील रहे । इन्हे दर्शन , मनोविज्ञान,ज्योतिष का अध्यन करने के साथ ही सुयोग्य अध्यात्मिक गुरु कि तलाश रही । इसी क्रम में एक बार रेल यात्रा के दोरान एक विभूति से इनकी मुलाकात हुई । अल्प बातचीत में विभूति ने श्री मोटा भाई के अतीत जीवन कि बाते बताई और अध्यात्मिक जीवन कि भविष्य वाणी करने के साथ उत्कृष्ट व समर्थ गुरु के सानिध्य में अध्यात्मिक साधना करने का सुअवसर शीघ्र ही मिलने कि बात कही। 
        गुजरात स्थित दाहोद में इनकी एक बहन का विवाह हुआ था तथा इनके बहनोई श्री मंगू भाई त्रिवेदी ने श्री मोटा भाई को गुजरात में जन्त्राल में प्रसिद्ध समर्थ गुरु प .पूज्य श्री रामशंकर जी जानी के बारे में बताया । चर्चा के अंतर्गत इन्हे आभास हुआ के जिन समर्थ गुरु कि इन्हे तलाश थी तथा रेल में मिले उस विभूति ने आध्यात्मिक गुरु के शीघ्र ही मिलने कि बात कही थी वे शायद यही है। वे अपने बहनोई के साथ जन्त्राल में प .पूज्य श्री रामशंकर जी जानी (बडे बापजी) के पास पहुचे । प्रथम भेट में ही चिरकाल से परिचित जैसा स्नेह व आशीर्वाद प्राप्त हुआ। बडे बापजी ने जन्त्राल में ऋषिकुल कि स्थापना करे चुनिन्दा शिष्यों को भजनों ,उपदेशो, सत्संग व पत्रों के माध्यम से दीक्षित किया । 
         सदगुरु श्री रामशंकर जी जानी ने दिनांक १६-०२-१९४७ को देह त्याग किया। उनके देहत्याग के पश्चात् उनके जयेष्ट पुत्र प .पूज्य श्री घनश्याम जी जानी ने बडे बापजी कि आध्यात्मिक विरासत को सत्संग ,सूत्रों से पोषित , पल्वित व फलित किया । बडे बापजी कि तरह ही प .पूज्य श्री घनश्याम प्रभु ने मोटा भाई को गले लगाया व अपार स्नेह दिया। घनश्याम प्रभु व मोटा भाई का साथ १४ वर्ष का रहा तथा दिनांक ०८-०७-१९६० को मात्र ४० वर्ष कि आयु में प .पूज्य श्री घनश्याम प्रभु(छोटे बापजी) ने अपना देहत्याग किया। प .पूज्य घनश्याम प्रभु के देहत्याग के बाद गुरु पत्नी जिन्हे भक्त गण प्रेम व आदर से गोपाल के नाम से पुकारते थे का आसीन स्नेह मोटा भाई को मिला ।
          वर्ष १९६८ में दो भक्त माताश्री गोपाल के आशीर्वाद के लिए भरूच माँ श्री के निवास पहुचे । माताश्री ने दोनों भक्तो को झाबुआ में गुरूभइयो कि झोपडी बांधने कि द्रष्टि से जमीन कार्य करने को कहा । माँ गोपाल से चर्चा में भक्तो ने कालोनी के निर्माण के साथ एक बड़ा कामन हाल चाहिए जिसपर केवल हाल बनाने कि सहमती दी गयी। सामूहिक भजन व पूजन के लिए भी एक स्थल मंदिर के रूप में बनाने का आग्रह किया जिस पर माँ गोपाल ने विषयक स्वीकृति दे दी। परन्तु पहले गुरु भाइयो के बंगले कार्य को ही प्राथमिकता दी जावे। मंदिर एवं कालोनी निर्माण हेतु श्री गणेश के लिए १००१/- माँ गोपाल ने श्री मोटा भाई को दिए और कहा कि अच्छा मुहर्त देखकर मंदिर का निर्माण शुरू करे । इसके साथ ही माँ गोपाल ने कालोनी निर्माण के सम्बन्ध में कुछ विशेष निर्देश दिये ।
  1. मंदिर के लिए चंदा नहीं लेना
  2. किसी का नाम लिखी वस्तु मंदिर में नहीं लगानी।
  3. मंदिर में मूर्ति नहीं लगानी।
  4. मंदिर में गुम्बज,घंटा,घड़ियाल,ध्वज,त्रिशूल,कलश आदि नहीं लगाना ।
  5. मंदिर दुसरो के देखने हेतु नहीं बनाना ।
  6. मंदिर केवल भक्तो के भजन हेतु बनाना
  7. मंदिर में केवल पांच फोटो लगाना।
  8. मंदिर में पुजारी के रहने के लिया पीछे कि दीवार एक हो।
  9. रसोई में छोटी अलमारी व फ्लेट रेक हो।
  10. बंगले के बडे कमरे में बड़ी अलमारी हो।
        इस प्रकार वर्ष १९६८ में कालोनी एवं मंदिर का निर्माण कार्य शुरू हुआ। इस पूरे परिवेश को गोपाल कालोनी का नाम दिया गया। मंदिर निर्माण पूर्ण होने के पश्चात् मंदिर उदघाटन के अवसर पर माँ गोपाल को मंदिर ले जाने का प्रस्ताव किया गया तो माँ गोपाल द्वारा इंकार करते ही फ़रमाया:- "मुझे किसे बताना है कि कीर्ति मिली है जब परमात्मा है तो में हो ही नहीं सकता । यह मंदिर और यह आवास गृह तो अपने भक्त बालको के लिए एक बहुत बड़ी सोगात है ।" 
        इस प्रकार माँ गोपाल ने दिनांक ०७-०२-१९७५ को अपनी सांसारिक यात्रा पूर्ण कर विश्राम हेतु स्वधाम प्रस्थित हुई। तथा आज माँ श्री के ही घर को ही "ऋषिकुल मंदिर" में परिवर्तित कर जन्त्राल में भव्य मंदिर का निर्माण किया गया । जहा अपनी शारीरिक हयाती के बिना ही बड़ी संख्या में भक्त गण गुरु पूर्णिमा व इसी प्रकार हर पूर्णिमा पर आते रहते है।
        झाबुआ के "श्री गोपाल मंदिर" तथा लिमखेडा के" श्री घनश्याम" मंदिर एवं ग्राम बावड़ी के के मंदिर "ऋषिकुल आश्रम बावड़ी" में भी ऋषिकुल मंडल के भक्त दर्शन , सत्संग का लाभ उठाते है । इस प्रकार प .पूज्य श्री मोटा भाई ( श्री विश्वनाथ जी त्रिवेदी) द्वारा जीवन पर्यंत तक प्रभु कि सेवा कि गयी व दिनांक 22-०8-1991 को उनका देहावसान हुआ। तत्पश्चात सेवाभार एवं पूजा अर्चना का कार्य मोटा भाई के जयेष्ट सुपुत्र श्री रविन्द्र नाथ जी त्रिवेदी द्वारा आरम्भ कि गई जिन्होने पूरी निष्ठा व आस्था के साथ प्रभु कि सेवा कि एवं वर्ष २००७ में उनका देवलोकगमन हुआ । वर्तमान में मंदिर कि पूजा अर्चना प .पूज्य स्व पं श्री रविन्द्र नाथ जी के जयेष्ट सुपुत्र पं रूपक त्रिवेदी द्वारा कि जा रही है ।

गोपाल मंदिर ट्रस्ट कार्यकारिणी सुची देखे , यहाँ क्लिक करे

ऋषिकुल झाबुआ


गोपाल मंदिर भक्त मंडल झाबुआ और गोपाल मंदिर जन्त्राल ,बावड़ी ,भरूच के अन्यत्र भक्तो के विशाल समूह से बना ऋषिकुल ! आज से ४० वर्ष पूर्व मंदिर निर्माण के समय मंदिर के समीप ही ३३ निवास स्थलों के सदस्यों का छोटा सा ऋषिकुल आज ४० वर्ष बाद हजारो भक्तो कि आस्था प्रेम वाला ऋषिकुल आश्रम बन चूका है ऋषिकुल में जन्त्राल , झाबुआ , बावड़ी के साथ - साथ आस पास के गाँव, शहरो , कस्बो जैसे अनेक भक्त ऋषिकुल और गोपाल मंदिर संचालित गतिविधियों में हिस्सा लेते है यही कारण है कि आज झाबुआ शहर अन्यत्र दूरस्थ शहरो में गोपाल मंदिर झाबुआ के द्वारा ही पहचाना जाता है झाबुआ शहर कि सांस्कृतिक धार्मिक छवि को पल्वित और पोषित करने हेतु गोपाल मंदिर ऐसे ही कई मंदिर जो पिछले कई वर्षो से अपने प्राचीन इतिहास को यथावत रखते हुए भक्तो के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए है उनका भी महत्वपूर्ण योगदान है सच ही है कि मध्य प्रदेश कि ऐतिहासिक स्थलों में झाबुआ जिले में सबसे अधिक धार्मिक, स्थल है जिनमे प्रमुख, गोपाल मंदिर झाबुआ, देवझिरी तीर्थ स्थल , बालाजी धाम जैसे अनेक धार्मिक स्थल मध्य प्रदेश के मानचित्र पर झाबुआ जिले को अलग पहचान दिलाये हुए है इसका सजीव उदाहरण गोपाल मंदिर झाबुआ में आने वाले दूरस्थ भक्त जिन्होंने गोपाल मंदिर झाबुआ को अब तक केवल वेबसाइट या इंटरनेट संस्करण पर ही देखा है वो इस में रूचि होने पर मंदिर परिसर में माँ श्री के साक्षात् दर्शन हेतु आये मंदिर में रोजाना अन्यत्र स्थानों से आने वाले भक्त जिनमे मंदिर के इतिहास को जानने कि रूचि को देखते हुए ऋषिकुल के बुजुर्ग भक्तो द्वारा जो स्वयं मंदिर के ४० वर्ष के इतिहास के साक्ष्य है उनके द्वारा अन्यत्र आने वाले भक्तो को इस सम्बन्ध में जानकारी उपलब्ध कराइ जाती है गोपाल मंदिर में ऋषिकुल भक्त बालको कि बढाती हुई संख्या माँ श्री के आशीर्वाद का परिचायक होने के साथ ही यह कहा जा सकता है भविष्य में गोपाल मंदिर झाबुआ का प्राचीन इतिहास प्रत्येक भक्त बालक कि जिव्हा पर होने के साथ ही झाबुआ जिले के प्राचीन इतिहास कि सूची में गोपाल मंदिर का नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित होगा, और शायद मंदिर का ये ही इतिहास युग युगांतर अपनी ऐतिहासिक छवि को सहेजे झाबुआ जिले के इतिहास में अपनी भव्य मोजुदगी दर्शायेगा

jhabua-history


jhabua princeझाबुआ शहर , यहाँ के राजा झब्बू नायक के नाम से प्रेरित है. झाबुआ शहर पर सेकड़ो वर्ष पहले झब्बू राजा की हुकूमत थी , तथा यहाँ जोधा राठोर राजवंश के महाराजा द्वारा आक्रमण कर झब्बू राजा को परास्त किया गया तत्पश्चात झाबुआ शहर में राजवंशी राज, एवं जोधा राठोर राजवंश के महाराजाओ की हुकूमत हुई.
      जोधा राठौर राजवंश के संस्थापक राव जोधा जी है जिनके ही नाम से राठौर रघुवंशी समाज को जोधा राठौर रघुवंशियो के रूप में जाना गया. झाबुआ शहर पर जोधा राठौर राजवंशी की हुकूमत ई .पु 1584 से शुरू हुई. झाबुआ शहर के प्रथम महाराजा व जोधा राठौर राजवंश के प्रथम रघुवंशी महाराजा केशवदासजी थे जिन्होंने ई. पु 1584 से 1607 तक साम्राज्य संभाला .
        इस प्रकार समय के साथ झाबुआ शहर पर जोधा राठौर राजवंश की राज गद्दी पर राजवंश के विभिन महाराजा आसीन हुए व झाबुआ शहर की बागडोर संभाली. झाबुआ शहर के २० वे महाराजा अजीत सिंह जी वर्ष 1965 से 2002 तक राजगद्दी पर आसीत रहे व वर्ष २००२ में उनके देहावसान के पश्चात् झाबुआ शहर के २१ वे महाराजा के रूप में नरेन्द्रसिंह जी का राजतिलक राज्याभिषेक किया गया . राजतिलक राजवंशी राजपुरोहित श्री हरिओम सिंह जी राजपुरोहित द्वारा अपने रक्त से किया गया . तत्पश्चात महाराजा नरेन्द्र सिंह जी को राजगद्दी पर आसीन किया गया .

GOPAL MANDIR MAP


आरती



गोपाल
मंदिर झाबुआ कि आरती ऑनलाइन पढने के लिए नीचे लिंक पर क्लिक करे
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प्रातःकालीन आरती

पुष्पांजलि आरती

गोपाल मंदिर की आरती MS-WORD फाइल के रूप में अपने COMPUTER में सेव करने के लिए नीचे डाउनलोड लिंक पर क्लिक करे

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गोपाल मंदिर ऑडियो आरती प्राप्त करने के लिए नीचे लिंक पर क्लिक करे

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Gopal Mandir Jhabua Online Darshan (Live Darshan)



गोपाल मंदिर झाबुआ द्वारा हाल ही में भक्तो हेतु ऑनलाइन दर्शन सुविधा का ओपचारिक अनावरण किया गया है। . अब सभी भक्त अपने कंप्यूटर पर ऑनलाइन दर्शन सेवा का लाभ ले सकते है इसके लिए नीचे बताये वेब लिंक पर क्लिक करे तत्पश्चात पूछे जाने पर नीचे छवि में बताये अनुसार सभी विकल्पों को भर कर ऑनलाइन दर्शन का लाभ लेवे। .
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gopal-mandir-jhabua-live-darshan-online-darshan-गोपाल मंदिर झाबुआ द्वारा भक्तो हेतु ऑनलाइन दर्शन
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gopal-mandir-jhabua-live-darshan-online-darshan-गोपाल मंदिर झाबुआ द्वारा भक्तो हेतु ऑनलाइन दर्शन
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निशुल्क मेसेज


                         गोपाल मंदिर ने मंदिर से जुडे सभी भक्त के लिए एवं सदस्यों के लिए निशुल्क मेसेज सुविधा शुरू कि है। जिससे इस सेवा से जुडे सभी लोगो को मंदिर के बारे में एवं मंदिर में समय समय पर होने वाले आयोजनों के बारे में अपने मोबाइल पर जानकारी निशुल्क जानकारी प्राप्त हो सके ! यह सेवा मंदिर में भक्तो के हितार्थ कुछ ही समय पूर्व शुरू कि गयी है परन्तु भक्तो कि रूचि के चलते आज बहुत कम समय में मेसेज सेवा को सेकड़ो भक्तो ने अपने मोबाइल पर शुरू कराया है। जिसकी सम्पूर्ण जानकारी मंदिर समिति के पास सुरक्षित है। अतः नये प्रयोक्ता इस सुविधा का लाभ लेने के लिए कृपया नीचे लिंक पर क्लिक करे या Join On Mobile बटन दबाकर अपना मोबाइल नंबर डाले :-


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ऑडियो भजन सूची


विशेष:- सभी भजन परमपूज्य स्व .पं. श्री रविंद्रनाथ जी त्रिवेदी के स्वर में हैं
डाउनलोड करने के लिए भजन लिंक पर क्लिक करे

  1. KARMO JAG MA KARTA RA.
  2. KYAN JAI NE
  3. MAHRA JEVAN KARI NAV
  4. VAHLA DINDAYAL
  5. BHAKTA RI JINDAGI RA
  6. KARU KOTI KOTI PRANAM
  7. PRIYATAM PRABHU KARIYE
  8. DARSHAN DO GHANSHYAM
  9. SIYARAM MA DRAD PRATIGYA
  10. MARA RAM NA VACHNO MA JHUTAP
  11. GAJO GAJO RE GUNDLA
  12. KAHO KYARE PADHRSHO DVARE
  13. EK BAR AA JEVAN ME
  14. AAO VISHVAPATI TARA VISHVASE
  15. AATO DEVADHI DEV KAHVAY JIVO DUNIYA ME
  16. AAVO RADHARAMAN MARO SHOBHAY
  17. ADHAM NE UGARE MA GOPAL TARO NAAM
  18. ANAND WAGA WAJE RE GAGAN MA
  19. DUKH MA DAGEY NAHI RE
  20. GOPAL TARI PRETAY BANDHAYA MARA PRAN
  21. GURU OM
  22. GURU PURAN DATAR
  23. HUN TO MANGU PRABHU JI ATLO RE
  24. KOI MARA GOPAL NE SANDESO KAHJO
  25. MA MERI MUJH PER DAYA KARO
  26. MARI ARAJ SUNO RE GOPAL
  27. VEHLA SUNJO VEHLA SUNJO
  28. KAHO KYARE PADHARSHO DVARE
  29. GOPALTAMARA CHRNO NI BHAKTI NE LEVA
  30. TARO JAI JAIKAR.
इला सांगा ऑडियो भजन (वार्षिक उत्सव २०१०, २०११ सी .डी विमोचन ) {डाउनलोड करे}
कपिल त्रिवेदी गुरु जाप ऑडियो { डाउनलोड करे }
अनूप जलोटा के स्वर में गोपाल मंदिर भजन { Coming Soon...}

Jhabua Aastha Ka Parve Varshik Utsav


                   झाबुआ शहर  , और गोपाल मंदिर भक्त मंडल के समस्त भक्तो के लिए आस्था , और विश्वास का का एक वृहद आयोजन वार्षिक उत्सव ... पिछले 42  वर्षो से अनवरत इसी तरह मनाया  जाना वाला यह धार्मिक आयोजन न सिर्फ गोपाल मंदिर भक्त मंडल और झाबुआ शहर  अपितु सम्पूर्ण भारत देश के भिन्न  भिन्न  राज्यों से आये समस्त भक्त बालको हेतु एक अत्यंत धार्मिक और वृहद आयोजन ...  !
       हर वर्ष मई माह में मनाया जाने वाले इस वृहद आयोजन में मंदिर पंडाल में ४ दिनों तक विभिन धार्मिक आयोजन किये जाते है जिनमे  गुरु मंत्र जप , मंदिर इतिहास से सम्बंधित सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता आदि आयोजन के साथ ही पुरे मंदिर प्रांगन में आकर्षक साज सज्जा  की जाती है ...... 
                    आज से ४२  वर्ष पूर्व मंदिर निर्माण के समय मंदिर के समीप ही ३३ निवास स्थलों के सदस्यों का छोटा सा ऋषिकुल आज ४२  वर्ष बाद हजारो भक्तो कि आस्था व प्रेम वाला ऋषिकुल आश्रम बन चूका है। ऋषिकुल में जन्त्राल , झाबुआ , बावड़ी के साथ - साथ आस पास के गाँव, शहरो , कस्बो जैसे अनेक भक्त ऋषिकुल और गोपाल मंदिर संचालित गतिविधियों में हिस्सा लेते है । यही कारण है कि आज झाबुआ शहर अन्यत्र व दूरस्थ शहरो में गोपाल मंदिर झाबुआ के द्वारा ही पहचाना जाता है।
                                            झाबुआ शहर कि सांस्कृतिक व धार्मिक छवि को पल्वित और पोषित करने हेतु गोपाल मंदिर व ऐसे ही कई मंदिर जो पिछले कई वर्षो से अपने प्राचीन इतिहास को यथावत रखते हुए भक्तो के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए है उनका भी महत्वपूर्ण योगदान है।
           सच ही है कि मध्य प्रदेश कि ऐतिहासिक स्थलों में झाबुआ जिले में सबसे अधिक धार्मिक, स्थल है जिनमे प्रमुख, गोपाल मंदिर झाबुआ, देवझिरी तीर्थ स्थल , बालाजी धाम, मातंगी धाम  जैसे अनेक धार्मिक स्थल मध्य प्रदेश के मानचित्र पर झाबुआ जिले को अलग पहचान दिलाये हुए है । इसका सजीव उदाहरण गोपाल मंदिर झाबुआ में आने वाले दूरस्थ भक्त जिन्होंने गोपाल मंदिर झाबुआ को अब तक केवल वेबसाइट या इंटरनेट संस्करण पर ही देखा है वो इस में रूचि होने पर मंदिर परिसर में माँ श्री के साक्षात् दर्शन हेतु आये। मंदिर में रोजाना अन्यत्र स्थानों से आने वाले भक्त जिनमे मंदिर के इतिहास को जानने कि रूचि को देखते हुए ऋषिकुल के बुजुर्ग भक्तो द्वारा जो स्वयं मंदिर के ४२  वर्ष के इतिहास के साक्ष्य है ।
         उनके द्वारा अन्यत्र आने वाले भक्तो को इस सम्बन्ध में जानकारी उपलब्ध कराइ जाती है। गोपाल मंदिर में ऋषिकुल भक्त बालको कि बढाती हुई संख्या माँ श्री के आशीर्वाद का परिचायक होने के साथ ही यह कहा जा सकता है भविष्य में गोपाल मंदिर झाबुआ का प्राचीन इतिहास प्रत्येक भक्त बालक कि जिव्हा पर होने के साथ ही झाबुआ जिले के प्राचीन इतिहास कि सूची में गोपाल मंदिर का नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित होगा, और शायद मंदिर का ये ही इतिहास युग युगांतर अपनी ऐतिहासिक छवि को सहेजे झाबुआ जिले के इतिहास में अपनी भव्य मोजुदगी दर्शायेगा।

बोधवानी


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भजन ऑडियो सी डी





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गोपाल मन्दिर आरती विडियो


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  • गोपाल मंदिर झाबुआ वार्षिक उत्सव २०१२ विडियो
  • भाग १ :- (Coming Soon...)
  • भाग २:- (Coming Soon...)
  • भाग ३:- (Coming Soon...)

गोपाल मंदिर के विडियो डाउनलोड करे बिना ऑनलाइन देखने के लिए यहाँ क्लिक करे

गोपाल मन्दिर पुस्तक भजन:-



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फोटो गेलेरी




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परम पूज्य घनश्याम प्रभु का 100 वॉ जन्मदिन शताब्दी महोत्सव 17 - 09 - 2014 के फोटो यहाँ से डाउनलोड करे 



सत्संग







गोपाल मंदिर वेबसाइट पर मंदिर के सत्संग जल्द ही उपलब्ध होंगे कृपया कुछ समय बाद पुनः पधारे , असुविधा के लिए खेद........




(Coming Soon......)
















वार्षिक गतिविधिया (Annual Activities)


                        गोपाल मंदिर झाबुआ  में वर्ष भर धार्मिक आयोजन  का सिलसिला अनवरत शुरू रहता है।  वर्ष के प्रारभ से वर्ष अंत तक क्रमशः व्रत त्यौहार तथा अन्य आयोजनो  द्वारा मंदिर प्रांगण में  भक्तो का भव्य जमावड़ा  लगा रहता है… गोपाल मंदिर से जुड़े समस्त भक्त शायद  संकल्पित है मंदिर से जुडी हर एक गतिविधि में अपनी प्रत्यक्ष उपस्थिति दर्ज़ करवाने में.… यही कारन है कि आयोजित हर एक धार्मिक आयोजन में हज़ारो कि संख्या में उपस्थि भक्त जो साक्षात् गुरु देव के दर्शन हेतु मंदिर प्रांगण में उपस्थित होते है मंदिर में वर्ष भर होने वाले धार्मिक आयोजन कुछ इस तरह है। ।

१) जनवरी :-\\
जनवरी माह के शुरू होते ही , और इसी तरह वर्ष आरम्भ होते ही मंदिर प्रांगण में प्रथम धार्मिक आयोजन परम पूज्य माँ श्री गोपाल  प्रभु जन्मोत्सव। पौष शुक्ल पक्ष कि चौदस तिथि के एक दिन पूर्व अन्यत्र स्थानो से आये गुरु भक्त  और इसी तरह शहर के भक्तो द्वारा जन्मोत्सव के दिन प्रातः ८ बजे से भजनो कि गूंज, ढोल, मंजीरा , और नगाड़ो कि थाप सम्पूर्ण शहर को इस धर्म मई माहोल में डुबो देती है,  गुरु ॐ और ओमकार धवनि से चारो और ऐसा खुशनुमा माहोल मानो सदियो  तक यह भजनो का राग इसी तरह  अनवरत  चलता  रहे.।


२)  फ़रवरी :-\\
फ़रवरी माह में बावड़ी  गोपाल मंदिर में वार्षिक महोत्सव का आयोजन।।।। झाबुआ भक्त मंडल और इसी तरह सम्पूर्ण भारत वर्ष में गुरु भक्तो द्वारा बावड़ी में स्वयं उपस्थित होकर महोत्सव में अपनी साक़िया भागदारी दर्ज़ कराइ जाती है.. 

३) अप्रैल :-\\
वर्ष के अप्रेल माह में श्री राम जन्मोत्सव के साथ ही मंदिर  प्रांगण में महाआरती का आयोजन  एवं तत्पश्चात महाप्रसादी वितरित किया जाता है श्रद्धालुओं दवारा बड़ी संख्या में मंदिर प्रांगण में उपस्थित होकर आयोजन  का लाभ लिया जाता है। । 

४)मई :-\\
मई माह में गोपाल मंदिर प्रांगण का सबसे वृहद आयोजन वार्षिक उत्सव को भव्य रूप में आयोजित किया जाता है।  उत्सव के पूर्व पुरे मंदिर प्रांगण में साफ सफाई , रंग रोगन के साथ ही सम्पूर्ण मंदिर प्रांगण में आकर्षक साज  सज्जा कि जाती है। . अन्यत्र स्थानो से आये भक्तो हेतु ठहरने कि  , भोजन इत्यादि कि  वयवस्था गोपाल मंदिर ट्रस्ट द्वारा बनाई गयी समिति द्वारा कि जाती है।  उत्सव चार दिन का होता है जिसमे तिन दिन तक विभिन धार्मिक आयोजन  जैसे गुरु ॐ जाप, भजन संध्या आदि का आयोजन गोपाल मंदिर द्वारा किया जाता है।उत्सव के दिन   प्रातः ८ बजे से १० बजे तक सदगुरु  चरण पादुका  एवं  तस्वीर पूजन, १० बजे से १२  बजे तक भजन एवं १२ बजे महा आरती पश्चात् , महाप्रसादी और भंडारे का आयोजन।  गोपाल मंदिर द्वारा आयोजित शायद यह आयोजन शहर का सबसे वृहद आयोजन होता है जिसमे कि शहर के साथ सम्पूर्ण भारत वर्ष के भक्त हज़ारो कि तादाद में मंदिर प्रांगण में अपनी उपस्थिति दर्ज़ कराकर आयोजन को सफल बनाते है।

५) जुलाई :-\\
जुलाई माह में गोपाल मंदिर प्रांगण में गुरु पूर्णिमा महोत्सव का आयोजन  रखा जाता है। . आयोजन में मंदिर प्रांगण में हज़ारो भक्तो का  जमावड़ा लगा रहता है।  प्रातः ८ से १० बजे तक गुरु पूजन तत्पश्चात भजन एवं फिर महा आरती का आयोजन , व फिर भंडारे का आयोजन किया जाता है वार्षिक उत्सव कि तरह ही गुरु पूर्णिमा आयजन भी उसी भव्य रूप में गोपाल मंदिर प्रांगण में मनाया जाता है। ।/// भक्तो कि प्रगान  आस्था और श्रद्धा का यह वृहद आयोजन न सिर्फ गोपाल मंदिर अपितु सम्पूर्ण शहर के लिए एक अत्यंत धर्म मई माहोल निर्मित करता दिखाई पड़ता है।  

६) सितम्बर :-\\
सितम्बर माह में गोपाल मंदिर प्रांगण में परम पूज्य छोटे बापजी जन्मोत्सव का आयोजन किया जाता है। । अन्य  धार्मिक आयोजन कि तरह इस दिन भी सम्पूर्ण मंदिर प्रांगण में आकर्षक सज सज्जा के साथ  प्रातः ८ से १० पूजन , तत्पश्चात भजन, एवं तत्पश्चात महा प्रसादी का आयोजन किया जाता। .बड़ी   संख्या में श्रद्धालु अपनी उपस्थिति दर्ज़ कराकर आयोजन को सफल बनाते है… 





७) अक्टूबर :-\\
अक्टूबर माह में परम पूज्य बड़े  बापजी जन्मोत्सव का आयोजन किया जाता है। इस दिन भी मंदिर प्रांगण में भक्तो कि अपर शरधा  और भक्ति के चलते विभिन धार्मिक आयोजन लिए जाते है जिनमे भजन संध्या  , महा आरती आदि है भक्तो द्वारा एक दिन पूर्व मंदिर प्रांगण में आकर सभी धार्मिक गतिविधियो का लाभ लिया जाता है। । 

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