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गोपाल मंदिर महू इंदौर (Gopal Mandir Mahu Indore)

गोपाल मंदिर लिमखेडा (गुजरात)

 गोपाल मंदिर लिमखेडा (Gopal Mandir Limkheda) 

गोपाल मंदिर बावड़ी (गुजरात)


गोपाल मंदिर बावड़ी (Gopal Mandir Bawdi Gujarat)

गोपाल मंदिर जंत्राल (गुजरात)


गोपाल मंदिर जंत्राल गुजरात
( Gopal Mandir Jantral, Kalol, Gujarat 389330)

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ऋषिकुल सानिध्य पुस्तक ऑनलाइन पड़े

गोपाल शिशु विद्या मंदिर

श्री गोपाल शिशु विद्या मंदिर में कक्षा 1 से 5 तक कक्षाएं आयोजित  है , उक्त विद्यालय की देख रेख का जिम्मा श्री गोपाल मंदिर ट्रस्ट द्वारा किया जाता है।  नियमित कक्षाओं के सञ्चालन के साथ ही समय समय पर विभिन्न्न गतिविधियों का आयोजन भी स्कूल प्रबंधन द्वारा  किया जाता है।  

श्री गोपाल पुस्तकालय / वाचनालय

श्री गोपाल मंदिर प्रांगण में ही गोपाल पुस्तकालय / वाचनालय  स्थित है।  वाचनालय प्रति दिन शाम ५ से ७  बजे तक खोला जाता है।  उक्त गोपाल वाचनालय में 40000 से भी अधिक पुस्तकों का समवेश है।  इनमे विभिन्न महापुरुषों  स्वामी विवेकानद , रामकृष्ण परमहसं , महात्मा गाँधी सहित सेकड़ो  जीवनी एवं धार्मिक पुस्तकों का समवेश है।  साथ ही यहाँ दैनिक रूप से विभिन्न समाचार पत्र एवं पत्रिकाओं को पाठको हेतु नियमित रूप से मंगवाया जाता है।  

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गोपाल मंदिर के फोटो वीडियो भजन आरती सतसंग आदि सीधे अपने मोबाइल पर पाने के लिए गोपाल मंदिर व्हाट्सप्प ग्रुप ज्वाइन करे . यहाँ आपको प्रतिदिन नए फोटो , लेटेस्ट इवेंट्स के लाइव वीडियो मंदिर प्रांगण में प्रतिदिन किये जाने वाले भजन ऑडियो एवं वीडियो रूप में प्राप्त होंगे . बड़े बापजी प.पूज्य रामशंकर जी एवं छोटे बापजी प.पूज्य घनश्याम प्रभु एवं माँ गोपाल द्वारा कथित सुविचार प्रतिदिन आपको इस व्हाट्सप्प ग्रुप पर प्राप्त होंगे. ग्रुप ज्वाइन करने के लिए नीचे लिंक पर क्लिक करे .

मंदिर विषयक

झाबुआ शहर के मध्य भाग में स्थित गोपाल मंदिर जिले भर में अपनी अलग पहचान बनाये हैं. वैसे तो शहर मैं सेकडो मंदिर हैं पर गोपाल मंदिर शायद अपने अलग अस्तित्व एवं प्राचीन स्म्रतियो के कारण शायद यहाँ के लोगो को और अन्यत्र निवासरत लोगो को अपनी और आकर्षित करता हैं. माँ गोपाल अपने पुरे परिवार के साथ यहाँ पर विराजित हैं मंदिर प्रांगन मैं समय समय पर विभिन् आयोज़न किये जाते हैं जिनमे प्रमुख वार्षिक उत्सव, गुरु पूर्णिमा आदि हैं. यहाँ पर विभिन् उत्सव जैसे राम नवमी,कृष्ण जन्माष्टमी,गणेश चथुर्ति आदि को भी भव्य रूप मैं मनाया जाता हैं. 
       गोपाल मंदिर का वार्षिक उत्सव प्रति वर्ष मई माह मैं मनाया जाता हैं उत्सव चार दिन का होता हैं जिसमे पुरे मंदिर पर आकर्षक साज़ सज्जा की जाती हैं गोपाल मंदिर झाबुआ के आलावा जन्त्राल , बावड़ी , भरूच, महू और मैं भी हैं गुरु पूर्णिमा के अवसर पर इन जगहों पर भी भव्य आयोज़न किये जाते हैं. झाबुआ स्थित गोपाल मंदिर मैं कार्य समिति के देखरेख मैं विभिन् संस्थाए भी संचालित की जाती हैं जिनमे श्री गोपाल वाचनालय, श्री गोपाल शिशु विद्या मंदिर आदि हैं. वाचनालय मैं धार्मिक, संस्कृतिक, साहित्यिक जैसे कुल २०००० हज़ार पुस्तकों का संग्रह हैं. विद्यालय मैं कक्षा १ से ५ तक कक्षाए आयोजीत की जाती हैं जिनका अधिपत्य एवं सञ्चालन मंदिर कार्यसमिति द्वारा किया जाता हैं. मंदिर मैं प्रातकाल मैं ९:३० बजे आरती की जाती हैं एवं सांयकाल मैं ८ से ९ भजन संध्या आयोजीत की जाती हैं विभिन् उत्सव के दोरान मंदिर मैं विशाल भंडारे का अयोज़ं किया जाता हैं जो मंदिर प्रांगन मैं होता हैं. 
<        गोपाल मंदिर का निर्माण आज से करीब 40 वर्ष पूर्व हुआ था तब यह स्थान पूरी तरह रिक्त था तथा मंदिर निर्माण के पश्चात् यहाँ कालोनी का निर्माण किया गया जिसे गोपाल कालोनी का नाम दिया गया। मंदिर में हाल ही में अपना निर्माण के ४० वर्ष पूरे किये है तथा अभी मई माह में वार्षिक उत्सव के रूप में मंदिर में भव्य आयोजन किया गया जिसमे विभिन स्थानों से हजारो भक्तो ने अपनी उपस्थिति दर्ज करा कर कार्यक्रम को सफल बनाया !
          गोपाल मंदिर झाबुआ शहर के मध्य भाग में स्थित है ! गोपाल मंदिर से दाहोद शहर की दुरी मात्र 75 कि.मी है व इंदौर शहर से दुरी मात्र 150 कि.मी है। उज्जैन शहर से भी दुरी अधिक नहीं है । इसके अलावा मध्य बिंदु में स्थित होने के कारण अन्य स्थानो से गोपाल मंदिर की दुरी अधिक नही है।गोपाल मंदिर के पास में ही कई छोटे छोटे गॉव है जिनमें रानापुर, थांदला , जोबट, मेघनेगर आदि है जो गोपाल मंदिर से कुछ ही कि.मी की दुरी पर है । इनमें मेघनगर जो कि गोपाल मंदिर से मात्र 15 कि.मी की दुरी पर स्थित है वहॉ पर रेल्वे स्टेशन की सुविधा भी है अन्यत्र स्थानो से आने वाले लोगो के लिए जो रेल मार्ग से गोपाल मंदिर तक पहुचना चाहते है वे सीधे ही रेल मार्ग से मेघनगर आकर यहॉ से उपयुक्त व्यवस्था बस जीप आदि व्यवस्था कर बिना किसी परेशानी के गोपाल मंदिर तक पहुच सकते है।

इतिहास

गोपाल मंदिर झाबुआ का निर्माण वर्ष 1970 में हुआ. मंदिर निर्माण पश्चात् मंदिर सुचारू रूप से चलाने हेतु सर्वसमिति से गोपाल मंदिर ट्रस्ट का गठन किया गया. गोपाल मंदिर के निर्माण में भक्त मंडल व ट्रस्ट के सभी सदस्यों के साथ ही ट्रस्ट में संरक्षक एवं वरिष्ट ट्रस्टी श्री विश्वनाथजी त्रिवेदी मोटा भाई की महत्वपूर्ण भूमिका रही. पं पूज्य श्री विश्वनाथ जी त्रिवेदी (मोटा भाई ) का जन्म मध्य भारत के सुदूर पश्चिम शेत्र में स्थित झाबुआ में श्री ललिता शंकर जी त्रिवेदी के सामान्य ब्राह्मन परिवार में १०-०९-१९१८ को हुआ था। 
       श्री मोटा भाई बचपन से ही गंभीर एवं चिन्तनशील रहे । इन्हे दर्शन , मनोविज्ञान,ज्योतिष का अध्यन करने के साथ ही सुयोग्य अध्यात्मिक गुरु कि तलाश रही । इसी क्रम में एक बार रेल यात्रा के दोरान एक विभूति से इनकी मुलाकात हुई । अल्प बातचीत में विभूति ने श्री मोटा भाई के अतीत जीवन कि बाते बताई और अध्यात्मिक जीवन कि भविष्य वाणी करने के साथ उत्कृष्ट व समर्थ गुरु के सानिध्य में अध्यात्मिक साधना करने का सुअवसर शीघ्र ही मिलने कि बात कही। 
        गुजरात स्थित दाहोद में इनकी एक बहन का विवाह हुआ था तथा इनके बहनोई श्री मंगू भाई त्रिवेदी ने श्री मोटा भाई को गुजरात में जन्त्राल में प्रसिद्ध समर्थ गुरु प .पूज्य श्री रामशंकर जी जानी के बारे में बताया । चर्चा के अंतर्गत इन्हे आभास हुआ के जिन समर्थ गुरु कि इन्हे तलाश थी तथा रेल में मिले उस विभूति ने आध्यात्मिक गुरु के शीघ्र ही मिलने कि बात कही थी वे शायद यही है। वे अपने बहनोई के साथ जन्त्राल में प .पूज्य श्री रामशंकर जी जानी (बडे बापजी) के पास पहुचे । प्रथम भेट में ही चिरकाल से परिचित जैसा स्नेह व आशीर्वाद प्राप्त हुआ। बडे बापजी ने जन्त्राल में ऋषिकुल कि स्थापना करे चुनिन्दा शिष्यों को भजनों ,उपदेशो, सत्संग व पत्रों के माध्यम से दीक्षित किया । 
         सदगुरु श्री रामशंकर जी जानी ने दिनांक १६-०२-१९४७ को देह त्याग किया। उनके देहत्याग के पश्चात् उनके जयेष्ट पुत्र प .पूज्य श्री घनश्याम जी जानी ने बडे बापजी कि आध्यात्मिक विरासत को सत्संग ,सूत्रों से पोषित , पल्वित व फलित किया । बडे बापजी कि तरह ही प .पूज्य श्री घनश्याम प्रभु ने मोटा भाई को गले लगाया व अपार स्नेह दिया। घनश्याम प्रभु व मोटा भाई का साथ १४ वर्ष का रहा तथा दिनांक ०८-०७-१९६० को मात्र ४० वर्ष कि आयु में प .पूज्य श्री घनश्याम प्रभु(छोटे बापजी) ने अपना देहत्याग किया। प .पूज्य घनश्याम प्रभु के देहत्याग के बाद गुरु पत्नी जिन्हे भक्त गण प्रेम व आदर से गोपाल के नाम से पुकारते थे का आसीन स्नेह मोटा भाई को मिला ।
          वर्ष १९६८ में दो भक्त माताश्री गोपाल के आशीर्वाद के लिए भरूच माँ श्री के निवास पहुचे । माताश्री ने दोनों भक्तो को झाबुआ में गुरूभइयो कि झोपडी बांधने कि द्रष्टि से जमीन कार्य करने को कहा । माँ गोपाल से चर्चा में भक्तो ने कालोनी के निर्माण के साथ एक बड़ा कामन हाल चाहिए जिसपर केवल हाल बनाने कि सहमती दी गयी। सामूहिक भजन व पूजन के लिए भी एक स्थल मंदिर के रूप में बनाने का आग्रह किया जिस पर माँ गोपाल ने विषयक स्वीकृति दे दी। परन्तु पहले गुरु भाइयो के बंगले कार्य को ही प्राथमिकता दी जावे। मंदिर एवं कालोनी निर्माण हेतु श्री गणेश के लिए १००१/- माँ गोपाल ने श्री मोटा भाई को दिए और कहा कि अच्छा मुहर्त देखकर मंदिर का निर्माण शुरू करे । इसके साथ ही माँ गोपाल ने कालोनी निर्माण के सम्बन्ध में कुछ विशेष निर्देश दिये ।
  1. मंदिर के लिए चंदा नहीं लेना
  2. किसी का नाम लिखी वस्तु मंदिर में नहीं लगानी।
  3. मंदिर में मूर्ति नहीं लगानी।
  4. मंदिर में गुम्बज,घंटा,घड़ियाल,ध्वज,त्रिशूल,कलश आदि नहीं लगाना ।
  5. मंदिर दुसरो के देखने हेतु नहीं बनाना ।
  6. मंदिर केवल भक्तो के भजन हेतु बनाना
  7. मंदिर में केवल पांच फोटो लगाना।
  8. मंदिर में पुजारी के रहने के लिया पीछे कि दीवार एक हो।
  9. रसोई में छोटी अलमारी व फ्लेट रेक हो।
  10. बंगले के बडे कमरे में बड़ी अलमारी हो।
        इस प्रकार वर्ष १९६८ में कालोनी एवं मंदिर का निर्माण कार्य शुरू हुआ। इस पूरे परिवेश को गोपाल कालोनी का नाम दिया गया। मंदिर निर्माण पूर्ण होने के पश्चात् मंदिर उदघाटन के अवसर पर माँ गोपाल को मंदिर ले जाने का प्रस्ताव किया गया तो माँ गोपाल द्वारा इंकार करते ही फ़रमाया:- "मुझे किसे बताना है कि कीर्ति मिली है जब परमात्मा है तो में हो ही नहीं सकता । यह मंदिर और यह आवास गृह तो अपने भक्त बालको के लिए एक बहुत बड़ी सोगात है ।" 
        इस प्रकार माँ गोपाल ने दिनांक ०७-०२-१९७५ को अपनी सांसारिक यात्रा पूर्ण कर विश्राम हेतु स्वधाम प्रस्थित हुई। तथा आज माँ श्री के ही घर को ही "ऋषिकुल मंदिर" में परिवर्तित कर जन्त्राल में भव्य मंदिर का निर्माण किया गया । जहा अपनी शारीरिक हयाती के बिना ही बड़ी संख्या में भक्त गण गुरु पूर्णिमा व इसी प्रकार हर पूर्णिमा पर आते रहते है।
        झाबुआ के "श्री गोपाल मंदिर" तथा लिमखेडा के" श्री घनश्याम" मंदिर एवं ग्राम बावड़ी के के मंदिर "ऋषिकुल आश्रम बावड़ी" में भी ऋषिकुल मंडल के भक्त दर्शन , सत्संग का लाभ उठाते है । इस प्रकार प .पूज्य श्री मोटा भाई ( श्री विश्वनाथ जी त्रिवेदी) द्वारा जीवन पर्यंत तक प्रभु कि सेवा कि गयी व दिनांक 22-०8-1991 को उनका देहावसान हुआ। तत्पश्चात सेवाभार एवं पूजा अर्चना का कार्य मोटा भाई के जयेष्ट सुपुत्र श्री रविन्द्र नाथ जी त्रिवेदी द्वारा आरम्भ कि गई जिन्होने पूरी निष्ठा व आस्था के साथ प्रभु कि सेवा कि एवं वर्ष २००७ में उनका देवलोकगमन हुआ । वर्तमान में मंदिर कि पूजा अर्चना प .पूज्य स्व पं श्री रविन्द्र नाथ जी के जयेष्ट सुपुत्र पं रूपक त्रिवेदी द्वारा कि जा रही है ।

गोपाल मंदिर ट्रस्ट कार्यकारिणी सुची देखे , यहाँ क्लिक करे

ऋषिकुल भक्त मंडल

गोपाल मंदिर भक्त मंडल झाबुआ और गोपाल मंदिर जन्त्राल ,बावड़ी ,भरूच के अन्यत्र भक्तो के विशाल समूह से बना ऋषिकुल ! आज से 48 वर्ष पूर्व मंदिर निर्माण के समय मंदिर के समीप ही ३३ निवास स्थलों के सदस्यों का छोटा सा ऋषिकुल आज 48 वर्ष बाद हजारो भक्तो कि आस्था व प्रेम वाला ऋषिकुल आश्रम बन चूका है। ऋषिकुल में जन्त्राल , झाबुआ , बावड़ी, लिमखेड़ा , महू  के साथ - साथ आस पास के गाँव, शहरो , कस्बो जैसे अनेक भक्त ऋषिकुल और गोपाल मंदिर संचालित गतिविधियों में हिस्सा लेते है । यही कारण है कि आज झाबुआ शहर अन्यत्र व दूरस्थ शहरो में गोपाल मंदिर झाबुआ के द्वारा ही पहचाना जाता है।
              झाबुआ शहर कि सांस्कृतिक व धार्मिक छवि को पल्वित और पोषित करने हेतु गोपाल मंदिर व ऐसे ही कई मंदिर जो पिछले कई वर्षो से अपने प्राचीन इतिहास को यथावत रखते हुए भक्तो के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए है उनका भी महत्वपूर्ण योगदान है। सच ही है कि मध्य प्रदेश कि ऐतिहासिक स्थलों में झाबुआ जिले में सबसे अधिक धार्मिक, स्थल है जिनमे प्रमुख, गोपाल मंदिर झाबुआ, देवझिरी तीर्थ स्थल , बालाजी धाम जैसे अनेक धार्मिक स्थल मध्य प्रदेश के मानचित्र पर झाबुआ जिले को अलग पहचान दिलाये हुए है । इसका सजीव उदाहरण गोपाल मंदिर झाबुआ में आने वाले दूरस्थ भक्त जिन्होंने गोपाल मंदिर झाबुआ को अब तक केवल वेबसाइट या इंटरनेट संस्करण पर ही देखा है वो इस में रूचि होने पर मंदिर परिसर में माँ श्री के साक्षात् दर्शन हेतु आये। मंदिर में रोजाना अन्यत्र स्थानों से आने वाले भक्त जिनमे मंदिर के इतिहास को जानने कि रूचि को देखते हुए ऋषिकुल के बुजुर्ग भक्तो द्वारा जो स्वयं मंदिर के 48 वर्ष के इतिहास के साक्ष्य है । उनके द्वारा अन्यत्र आने वाले भक्तो को इस सम्बन्ध में जानकारी उपलब्ध कराइ जाती है।
    गोपाल मंदिर में ऋषिकुल भक्त बालको कि बढती हुई संख्या माँ श्री के आशीर्वाद का परिचायक होने के साथ ही यह कहा जा सकता है भविष्य में गोपाल मंदिर झाबुआ का प्राचीन इतिहास प्रत्येक भक्त बालक कि जिव्हा पर होने के साथ ही झाबुआ जिले के प्राचीन इतिहास कि सूची में गोपाल मंदिर का नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित होगा, और शायद मंदिर का ये ही इतिहास युग युगांतर अपनी ऐतिहासिक छवि को सहेजे झाबुआ जिले के इतिहास में अपनी भव्य मोजुदगी दर्शायेगा।

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Gopal Mandir Jhabua Online Darshan (Live Darshan)


गोपाल मंदिर झाबुआ द्वारा हाल ही में भक्तो हेतु ऑनलाइन दर्शन सुविधा का ओपचारिक अनावरण किया गया है। . अब सभी भक्त अपने कंप्यूटर पर ऑनलाइन दर्शन सेवा का लाभ ले सकते है इसके लिए नीचे बताये वेब लिंक पर क्लिक करे तत्पश्चात पूछे जाने पर नीचे छवि में बताये अनुसार सभी विकल्पों को भर कर ऑनलाइन दर्शन का लाभ लेवे। .
                             भक्तो एक बात का अवश्य ख्याल रखे की ऑनलाइन दर्शन हेतु नीचे बताया वेबपता  Internet explore ब्राउसर में खोले  mozila firefox एवं  Google Chrome ब्राउसर में ऑनलाइन दर्शन हेतु फ़्लैश प्लगिन ठीक से कार्य नहीं करता है अतः निवेदन है की ऑनलाइन दर्शन हेतु Internet explore ब्राउसर का ही प्रयोग करे।

ऑनलाइन दर्शन हेतु नीचे बताये अनुसार सेटिंग करे :-

gopal-mandir-jhabua-live-darshan-online-darshan-गोपाल मंदिर झाबुआ द्वारा भक्तो हेतु ऑनलाइन दर्शन
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gopal-mandir-jhabua-live-darshan-online-darshan-गोपाल मंदिर झाबुआ द्वारा भक्तो हेतु ऑनलाइन दर्शन
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निशुल्क मेसेज

                         गोपाल मंदिर ने मंदिर से जुडे सभी भक्त के लिए एवं सदस्यों के लिए निशुल्क मेसेज सुविधा शुरू कि है। जिससे इस सेवा से जुडे सभी लोगो को मंदिर के बारे में एवं मंदिर में समय समय पर होने वाले आयोजनों के बारे में अपने मोबाइल पर जानकारी निशुल्क जानकारी प्राप्त हो सके ! यह सेवा मंदिर में भक्तो के हितार्थ कुछ ही समय पूर्व शुरू कि गयी है परन्तु भक्तो कि रूचि के चलते आज बहुत कम समय में मेसेज सेवा को सेकड़ो भक्तो ने अपने मोबाइल पर शुरू कराया है। जिसकी सम्पूर्ण जानकारी मंदिर समिति के पास सुरक्षित है। अतः नये प्रयोक्ता इस सुविधा का लाभ लेने के लिए कृपया नीचे लिंक पर क्लिक करे या Join On Mobile बटन दबाकर अपना मोबाइल नंबर डाले :-


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ऑडियो भजन

विशेष:- सभी भजन परमपूज्य स्व .पं. श्री रविंद्रनाथ जी त्रिवेदी के स्वर में हैं
डाउनलोड करने के लिए भजन लिंक पर क्लिक करे

  1. कर्मो जग मा करता रहिने 
  2. क्या जई  ने  
  3. म्हरा जीवन केरी नाव 
  4. व्हाला दीनदयाल  क्या रे बोलवशो 
  5. भक्ता री  जिंदगी  रा आधार है तो तू है 
  6. करू कोटि कोटि प्रणाम 
  7. प्रियतम प्रभु करिये वंदना 
  8. दर्शन दो घनश्याम नाथ 
  9. सियाराम मा दृढ़ प्रतिज्ञ थता 
  10. तारो जय  जयकार 
  11. दयामय मंगल मंदिर खोलो 
  12. विश्व माहि दीठा में विश्वनाथ ज्यां ज्यां 
  13. मारा राम न वचनो में झुटप होय नाही 
  14. तारो तमे तोज तरिये रे 
  15. गाजो गाजो रे गुंडला 
  16. में हाथ उठावी लीधो रे 
  17. कहो क्यारे पधारशो द्वारे 
  18. एक वार आ जीवन मा दर्शन प्रभु तमारा 
  19. ओ विश्वपति तारा विश्वासे म्हारो चाले के वेपार 
  20. आतो देवाधि देव कहवाये जीवो दुनिया में 
  21. आओ राधा रमन मारो शोभे जीवन 
  22. अधम ने उगारे माँ गोपाल तारो नाम 
  23. आनंद वाजा वागे रे गगन मा 
  24. दुःख में डगे नहीं रे 
  25. गोपाल म्हने चाकर रखो जी 
  26. गोपाल न मंदरिये 
  27. गोपाल तमारा चरणों नी भक्ति ने लेवा आव्यो छू 
  28. गोपाल तारी प्रीते  बंधाया मारा प्राण 
  29. गुरु ॐ गुरु ॐ गुरु ॐ 
  30. गुरु पुराण दातार हमारे 
  31. हूँ तो मांगू प्रभु जी अटेलो रे 
  32. कोई म्हारा गोपाल ने संदेसो कहेजो 
  33. माँ मेरी मुझ पर दया करो 
  34. म्हारा जनम मरण रा साथी 
  35. म्हारी अर्ज  सुनो रे गोपाल
  36. में गिरधर रँगराती 
  37. प्रभु एक मांगनी मारी 
  38. रही जाओ श्याम तमे आज नी  
  39. साँचा सगा म्हारा गुरूजी रे 
  40. सद्गुरु दया करो 
  41. श्री सद्गुरु शरणम् मम् 
  42. वेहला सुणजो वेहला सुणजो 
  43. कहो क्यारे पधारशो द्वारे  
इला सांगा ऑडियो भजन (वार्षिक उत्सव २०१०, २०११ सी .डी विमोचन ) {डाउनलोड करे}
कपिल त्रिवेदी गुरु जाप ऑडियो { डाउनलोड करे }
पार्श्व भजन गायको के स्वर में गोपाल मंदिर भजन  { डाउनलोड करे }

Jhabua Aastha Ka Parve Varshik Utsav

                   झाबुआ शहर  , और गोपाल मंदिर भक्त मंडल के समस्त भक्तो के लिए आस्था , और विश्वास का का एक वृहद आयोजन वार्षिक उत्सव ... पिछले 42  वर्षो से अनवरत इसी तरह मनाया  जाना वाला यह धार्मिक आयोजन न सिर्फ गोपाल मंदिर भक्त मंडल और झाबुआ शहर  अपितु सम्पूर्ण भारत देश के भिन्न  भिन्न  राज्यों से आये समस्त भक्त बालको हेतु एक अत्यंत धार्मिक और वृहद आयोजन ...  !
       हर वर्ष मई माह में मनाया जाने वाले इस वृहद आयोजन में मंदिर पंडाल में ४ दिनों तक विभिन धार्मिक आयोजन किये जाते है जिनमे  गुरु मंत्र जप , मंदिर इतिहास से सम्बंधित सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता आदि आयोजन के साथ ही पुरे मंदिर प्रांगन में आकर्षक साज सज्जा  की जाती है ...... 
                    आज से ४२  वर्ष पूर्व मंदिर निर्माण के समय मंदिर के समीप ही ३३ निवास स्थलों के सदस्यों का छोटा सा ऋषिकुल आज ४२  वर्ष बाद हजारो भक्तो कि आस्था व प्रेम वाला ऋषिकुल आश्रम बन चूका है। ऋषिकुल में जन्त्राल , झाबुआ , बावड़ी के साथ - साथ आस पास के गाँव, शहरो , कस्बो जैसे अनेक भक्त ऋषिकुल और गोपाल मंदिर संचालित गतिविधियों में हिस्सा लेते है । यही कारण है कि आज झाबुआ शहर अन्यत्र व दूरस्थ शहरो में गोपाल मंदिर झाबुआ के द्वारा ही पहचाना जाता है।
                                            झाबुआ शहर कि सांस्कृतिक व धार्मिक छवि को पल्वित और पोषित करने हेतु गोपाल मंदिर व ऐसे ही कई मंदिर जो पिछले कई वर्षो से अपने प्राचीन इतिहास को यथावत रखते हुए भक्तो के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए है उनका भी महत्वपूर्ण योगदान है।
           सच ही है कि मध्य प्रदेश कि ऐतिहासिक स्थलों में झाबुआ जिले में सबसे अधिक धार्मिक, स्थल है जिनमे प्रमुख, गोपाल मंदिर झाबुआ, देवझिरी तीर्थ स्थल , बालाजी धाम, मातंगी धाम  जैसे अनेक धार्मिक स्थल मध्य प्रदेश के मानचित्र पर झाबुआ जिले को अलग पहचान दिलाये हुए है । इसका सजीव उदाहरण गोपाल मंदिर झाबुआ में आने वाले दूरस्थ भक्त जिन्होंने गोपाल मंदिर झाबुआ को अब तक केवल वेबसाइट या इंटरनेट संस्करण पर ही देखा है वो इस में रूचि होने पर मंदिर परिसर में माँ श्री के साक्षात् दर्शन हेतु आये। मंदिर में रोजाना अन्यत्र स्थानों से आने वाले भक्त जिनमे मंदिर के इतिहास को जानने कि रूचि को देखते हुए ऋषिकुल के बुजुर्ग भक्तो द्वारा जो स्वयं मंदिर के ४२  वर्ष के इतिहास के साक्ष्य है ।
         उनके द्वारा अन्यत्र आने वाले भक्तो को इस सम्बन्ध में जानकारी उपलब्ध कराइ जाती है। गोपाल मंदिर में ऋषिकुल भक्त बालको कि बढाती हुई संख्या माँ श्री के आशीर्वाद का परिचायक होने के साथ ही यह कहा जा सकता है भविष्य में गोपाल मंदिर झाबुआ का प्राचीन इतिहास प्रत्येक भक्त बालक कि जिव्हा पर होने के साथ ही झाबुआ जिले के प्राचीन इतिहास कि सूची में गोपाल मंदिर का नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित होगा, और शायद मंदिर का ये ही इतिहास युग युगांतर अपनी ऐतिहासिक छवि को सहेजे झाबुआ जिले के इतिहास में अपनी भव्य मोजुदगी दर्शायेगा।

बोधवानी

 
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