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ऋषिकुल भक्त मंडल

गोपाल मंदिर झाबुआ

आस्था, इतिहास और संस्कारों का 52 वर्षों का भव्य महात्म्य

गोपाल मंदिर झाबुआ

ऋषिकुल: आस्था का अटूट केंद्र

गोपाल मंदिर भक्त मंडल झाबुआ एवं जन्त्राल, बावड़ी और भरूच के भक्तों के असीम स्नेह और समर्पण से सींचा गया 'ऋषिकुल', आज हजारों श्रद्धालुओं के लिए आस्था का पावन धाम बन चुका है। 52 वर्ष पूर्व, जब मंदिर की नींव रखी गई थी, तब यह मात्र 33 परिवारों का एक लघु ऋषिकुल था, जो आज अपनी भव्यता के साथ एक विशाल आश्रम के रूप में पुष्पित-पल्लवित हो चुका है।

आज झाबुआ, जन्त्राल, बावड़ी, लिमखेड़ा एवं महू सहित निकटवर्ती क्षेत्रों के भक्तगण इस ऋषिकुल और मंदिर की विविध गतिविधियों में पूर्ण निष्ठा से भाग लेते हैं। यही कारण है कि गोपाल मंदिर झाबुआ की गौरवमयी पहचान आज न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि दूरस्थ शहरों तक भी विस्तृत है।

"आस्था, सेवा, संस्कार और समर्पण"

यही है गोपाल मंदिर झाबुआ की पहचान, जिसने पाँच दशकों से अधिक समय तक हजारों भक्तों को आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान की है।

52 वर्षों की गौरव यात्रा

52+

वर्षों का गौरवशाली इतिहास

10000+

सक्रिय भक्त परिवार

40+

वार्षिक धार्मिक आयोजन

10,0000+

श्रद्धालुओं की आस्था

सांस्कृतिक एवं धार्मिक गौरव

झाबुआ जिले की सांस्कृतिक छवि को पल्लवित करने में गोपाल मंदिर, देवझिरी तीर्थ और बालाजी धाम का अप्रतिम योगदान है। इन धार्मिक स्थलों ने न केवल मध्य प्रदेश के मानचित्र पर जिले को विशिष्ट पहचान दिलाई है, बल्कि ये प्राचीन इतिहास के जीवंत साक्ष्य बने हुए हैं।

परंपरा के संरक्षक

मंदिर में पधारने वाले श्रद्धालु, जो अब तक मात्र डिजिटल माध्यमों से इसकी भव्यता को निहारते थे, आज माँ श्री के साक्षात दर्शन कर अभिभूत होते हैं। मंदिर के 52 वर्षों के इतिहास को भावी पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए हमारे ऋषिकुल के वयोवृद्ध भक्तगण सदैव तत्पर रहते हैं, जो मंदिर की प्रत्येक कालखंड के प्रत्यक्षदर्शी हैं।

भविष्य का संकल्प

ऋषिकुल में बभक्तों की बढ़ती संख्या माँ श्री के अनंत आशीर्वाद का परिचायक है। हमारा संकल्प है कि आने वाली पीढ़ियां न केवल इस स्वर्णिम इतिहास को अपनी जुबान पर रखेंगी, बल्कि गोपाल मंदिर का नाम झाबुआ के गौरवशाली इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में सदैव अंकित रहेगा। यह ऐतिहासिक धरोहर युग-युगांतर तक अपनी भव्य उपस्थिति से लोक कल्याण का मार्ग प्रशस्त करती रहेगी।

क्या आप मंदिर का इतिहास जानना चाहते हैं?

मंदिर परिसर में पधारें और ऋषिकुल के उन साक्ष्यों से मिलें जिन्होंने 52 वर्षों का यह गौरवशाली सफर अपनी आँखों से देखा है।

 
गुरु मंत्र
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