भक्तिपथ... इसमें जुड़े हैं कई समाज, भजन से होती है भक्ति, 1929 में की गई थी इस पथ की स्थापना
- पहले गुरु की बहू थीं रविकांताबेन, भक्तों ने नाम दिया- गोपाल प्रभु, उन्हीं के लिए जन्मशताब्दी समारोह
- 48 साल पहले भक्तों ने श्रमदान कर बनाया था मंदिर, यहां मूर्ति नहीं चित्र पूजा का है महत्व
झाबुआ। शहर के गोपाल काॅलोनी स्थित गोपाल मंदिर में शताब्दी समारोह-2020 के उपलक्ष में त्रि-दिवसीय महोत्सव के तहत अंतिम दिन गोपाल प्रभु की महाआरती का आयोजन हुआ। महाआरती दोपहर ठीक 12 बजे आरंभ हुई। इससे पूर्व भजन-किर्तन किए गए। महाआरती के दौरान भक्तों ने उत्साहपूर्वक नृत्य भी किया। बाद सभी भक्तों ने कतार में खड़े रहकर महाप्रसादी प्राप्त की। जिन गोपाल प्रभु का पर्व मनाया जा रहा है, वो भक्ति के इस पथ की तीसरी गादीपति थीं। उनका असली नाम रविकांताबेन जानी था। गोपाल प्रभु नाम भक्तों ने उन्हें दिया था। उनके सांसारिक पति घनश्यामराय जानी जिन्हें छोटे बापजी कहा जाता है, ने गादी सौंपी थी। छोटे बापजी ने अपने सांसारिक पिता रामशंकर जानी की जिम्मेदारी संभाली थी। गोपाल प्रभु का जन्म 4 जनवरी 1920 को हुआ था। ये पौष चौदस का दिन था।
1968 में झाबुआ का गोपाल मंदिर बनना शुरू हुआ। भक्तों ने श्रमदान कर मंदिर बनाया। 6 मई 1971 को मोहिनी एकादशी पर मंदिर का शुभारंभ हुआ।
भक्ति के इस पथ की शुरुआत बड़े बापजी (रामशंकर जानी) ने 1929 में की थी। उनका मूल स्थान अभी गुजरात के जंत्राल में है। उनके बाद छोटे बापजी और 1960 से 1975 में देह त्यागने तक गोपाल प्रभु ने मार्ग दिखाया। इस पथ के ये तीन गुरु ही रहे। 1960 में छोटे बापजी ने देह त्यागने से पहले मूर्ति पूजा की बजाय चित्र पूजा का रास्ता दिखाया था। गोपाल मंदिर में कोई मूर्ति नहीं है। यहां न ध्वज लगता है न घंटी है। समारोह में 9 जनवरी, गुरूवार को सुबह 6 से 8 बजे तक ध्यान, 8 से 10 बजे गुरू ऊॅं जाप, 8 से दोपहर 11.30 बजे तक सद्गुरू पूजन, इस दौरान सुबह 10 से दोपहर 12 बजे तक भजनों में भी बड़ी संख्या में भक्तजन शामिल हुए। दोपहर ठीक 12 बजे से गोपाल प्रभु की जन्मोत्सव महाआरती आरंभ हुई, जो आधे घंटे तक चली। इस दौरान युवाओं ने गोपाल प्रभुजी के जयकारे लगाते हुए नृत्य भी किया। महाआरती में क्षेत्रीय सांसद श्री डामोर, भाजपा जिलाध्यक्ष श्री शर्मा, नगरपालिका अध्यक्ष श्रीमती डोडियार, मप्र कर्मचारी कांग्रेस जिलाध्यक्ष भेरूसिंह सोलंकी, प्रसिद्ध चिकित्सक डाॅ. शीना भूरिया ने भी शामिल होकर बाद गोपाल प्रभुजी के दर्शन का भी लाभ लिया। महाआरती के दौरान पूरा परिसर गोपाल प्रभुजी के जयकारों से गूंजायमान होने के साथ ही श्रद्धालुओं की भीड़ से खचाखच भर गया। तत्पष्चात् मंदिर परिसर में सभी भक्तजनों को प्रसादी का वितरण किया गया। श्रद्धालुओं ने कतार में खड़े रहकर प्रसादी प्राप्त की। शाम 6.30 बजे से सद्गुरू लीला दर्शन (व्याख्यान) एवं रात्रि 8.30 बजे से भजन संध्या का आयोजन हुआ।भव्य शोभा यात्रा का हुआ आयोजन
गोपाल आओ तो सही एक बार म्हारा
मंदिरये, थारा मंदिस्ये कैसे आऊं
सांवरिया..., गोपाल कॉलोनी में म्हारा
गुरुजी विराजे, गावो गावो गोपाल प्रभु
ना भजन गावो. ..जैसे सुमधुर भजनों के
साथ गोपाल कॉलोनी में श्री गोपाल प्रभु के 100वें जन्म शताब्दी महोत्सव के तहत
बुधवार को शोभायात्रा निकाली गई।
तीन दिवसीय इस आयोजन में न्यूयॉर्क, अमेरिका , लंदन के साथ ही बैंगलुरू, गुजरात, राजस्थान, छत्तीसगढ़ , महाराष्ट्र , दिल्ली में निवासरत हज़ारो भक्त इस अध्यात्म महोत्सव में शामिल हुए। भव्य शोभायात्रा में विशेष परिधान पहनकर
भक्त शामिल हुए। शोभायात्रा का जगह-
जगह पुष्पमालाओं से स्वागत किया गया।
शोभायात्रा 4 घंटे तक विभिन्न मार्गों से
होकर निकली।
गोपाल प्रभु के भजनों
की एक से बढ़कर एक प्रस्तुतिया दी गई। इस अवसर पर गरबों का
आयोजन भी किया गया। बालिकाओं ने शानदार
गरबों की प्रस्तुति दी। यह आयोजन देर
शाम तक चलता रहा।
भक्तो विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित इस महोत्सव की कवरेज इस लिंक पर क्लिक कर देखे :


















