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झाबुआ में आस्था का महाकुंभ: सद्गुरु घनश्याम प्रभु के जन्मशताब्दी महोत्सव में उमड़ा भक्ति का सैलाब

झाबुआ। झाबुआ की धरा पर इन दिनों भक्ति और अध्यात्म की ऐसी बयार बह रही है, जिसने पूरे शहर को राममय बना दिया है। अवसर है गोपाल मंदिर में सद्गुरु घनश्यामरायजी जानी, जिन्हें भक्त प्रेम से 'छोटे बाबजी' के नाम से संबोधित करते हैं, के 100वें जन्मदिवस का। तीन दिनों तक चले इस ऐतिहासिक जन्मशताब्दी महोत्सव ने न केवल झाबुआ, बल्कि मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात जैसे पड़ोसी राज्यों से आए हजारों भक्तों के हृदय को श्रद्धा के रस में भिगो दिया।  भजनो की धुन, ढोल - मंज़ीरो की थाप , गुरु की भक्ति में लीन झूमते हुए भक्त और आस्था का भव्य सैलाब !! यह सब मौजूद था भक्तो के अनंत , अविभूषित और ब्रह्म मूर्ति परम पूज्य घनश्याम प्रभु के १०० वे जन्म शताब्दी महोत्सव में... देश भर से आये हज़ारो श्रधालुओ ने गुरु के चरणो में नमन और सत्कार का ऐसा राग छेड़ा मानो इस गुरु भक्ति का यह राग सदियों तक यु ही चलता रहे ..

वरघोड़े के साथ हुआ आध्यात्मिक शुभारंभ
महोत्सव का आगाज़ सोमवार की शाम को एक भव्य 'वरघोड़े' के साथ हुआ। जैसे ही गोपाल मंदिर से बैंड-बाजों की मंगल ध्वनि गुंजायमान हुई, पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। छोटे बाबजी की दिव्य तस्वीर को एक सुसज्जित बग्गी पर विराजित किया गया था। इस आलौकिक नजारे को देखने के लिए गोपाल कॉलोनी की सड़कों पर भक्तों का हुजूम उमड़ पड़ा। आतिशबाजी के शोर और भजनों की स्वर लहरियों के बीच, यह वरघोड़ा जब गोपाल कॉलोनी से गुजरा, तो ऐसा लग रहा था मानो स्वयं ईश्वर अपने भक्तों के बीच विचरण कर रहे हों। 43 वर्षों के इतिहास में यह पहला अवसर था जब गोपाल कॉलोनी में प्रभु का वरघोड़ा निकाला गया, जिसे लेकर भक्तों की उत्तेजना देखते ही बनती थी। रास्ते भर पुष्प वर्षा और जगह-जगह जलपान की व्यवस्था ने भक्तों के सेवा भाव को प्रदर्शित किया।


Gopal-Mandir-Jhabua-Ghanshyam-Prabhu-100th-birth centenary-festival-Jhabua-2014-झाबुआ गोपाल मंदिर में "घनश्याम प्रभु का 100 वॉ जन्म शताब्दी महोत्सव आयोजित "भक्ति के उफान में डूबा हर मन
वरघोड़े के दौरान भक्ति के ऐसे भजन गूंजे कि भक्तगण खुद को थिरकने से नहीं रोक सके। युवक-युवतियों का उत्साह तो देखते ही बनता था, लेकिन उम्र के जिस पड़ाव पर शरीर साथ कम देता है, वहां भी बुजुर्गों के हाथ श्रद्धा में ऊपर उठ गए। यह उस अटूट विश्वास का प्रमाण था जो भक्तों का अपने सद्गुरु के प्रति है। भक्तों ने इसे अपने जीवन का सबसे सौभाग्यशाली पल बताया, क्योंकि उन्हें अपने प्रभु की 100वीं वर्षगांठ का साक्षी बनने का अवसर मिला था। 


101 भोग का नैवेद्य: आस्था का अभूतपूर्व समर्पण
महोत्सव के समापन दिवस, यानी बुधवार को मुख्य आयोजन ने आस्था के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। मंदिर परिसर भक्तों से खचाखच भरा हुआ था। सद्गुरु के प्रति समर्पित इस महोत्सव में भक्तों की आस्था इतनी प्रबल थी कि वे प्रभु चरणों में नैवेद्य अर्पित करने के लिए आतुर थे। शुरुआत में छप्पन भोग का नैवेद्य अर्पित करने का निर्णय लिया गया था, परंतु भक्तों की उमड़ती आस्था और समर्पण को देखते हुए इसे बढ़ाकर 101 भोग के महा-नैवेद्य में परिवर्तित कर दिया गया। दोपहर 12 बजे आयोजित महाआरती के दौरान जब 101 भोग के नैवेद्य का भोग लगाया गया, तो समूचा वातावरण सकारात्मक ऊर्जा और दिव्य शांति से भर गया। 

आध्यात्मिक अनुष्ठान और महाप्रसादी

महोत्सव के दौरान मंगलवार रात से शुरू हुआ भजनों का क्रम बुधवार अलसुबह तक अनवरत चलता रहा। सुबह 8:30 बजे से पूजन कार्यक्रम शुरू हुआ, जिसके बाद 10 बजे से सामूहिक भजनों की गूंज सुनाई दी। महाआरती के बाद, भक्तों ने सामूहिक नृत्य के माध्यम से अपनी खुशी का इजहार किया। तत्पश्चात, महाप्रसादी का दौर शाम तक जारी रहा, जिसमें दूर-दराज से आए हजारों भक्तों ने प्रसाद ग्रहण कर स्वयं को धन्य माना।

मंदिर की सजावट: दिव्य स्वरूप का दर्शन
तीन दिवसीय इस आयोजन के लिए गोपाल मंदिर को दुल्हन की तरह सजाया गया था। परिसर में बनाई गई आकर्षक रंगोली हर आने-जाने वाले का मन मोह रही थी। फूलों की मनमोहक सज्जा और विद्युत रोशनी से जगमगाते गोपाल मंदिर के साथ-साथ, गोपाल कॉलोनी के रहवासियों ने भी अपने घरों को विशेष रूप से सजाया था। हर घर और हर रास्ता यह कह रहा था कि उनके प्रभु का 100वां जन्मदिवस कोई साधारण पर्व नहीं, बल्कि एक युग परिवर्तनकारी उत्सव है।

गुरु की परंपरा और भक्तों का प्रेम
उल्लेखनीय है कि सद्गुरु घनश्यामरायजी जानी 'छोटे बाबजी' का जन्म वर्ष 1914 में हुआ था। उनकी शिक्षाओं और मार्गदर्शन ने हजारों लोगों को एक सही जीवन पथ पर अग्रसर किया है। आज उनकी 100वीं वर्षगांठ पर इतनी बड़ी संख्या में भक्तों की उपस्थिति यह दर्शाती है कि भौतिकता की इस दौड़ में भी मनुष्य का मन अध्यात्म और गुरु भक्ति के प्रति कितना लालायित है।


क्षेत्रीय सांसद दिलीपसिंह भूरिया और विधायक शांतिलाल बिलवाल सहित कई गणमान्य नागरिक भी इस ऐतिहासिक आयोजन में पहुंचे और सद्गुरु के चित्र के समक्ष शीश नवाकर आशीर्वाद प्राप्त किया। झाबुआ के गोपाल मंदिर में आयोजित यह जन्मशताब्दी महोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं था, बल्कि यह गुरु-शिष्य की उस अटूट परंपरा का उत्सव था जो समय की सीमाओं से परे है। भक्तगण जब अपने घरों को लौटे, तो उनके चेहरों पर एक अलग ही चमक और तृप्ति थी। यह आयोजन आने वाले कई वर्षों तक झाबुआ की आध्यात्मिक स्मृतियों में दर्ज रहेगा। भक्तों का कहना है कि उन्होंने ऐसा उत्सव पहले कभी नहीं देखा था। यह तीन दिवसीय महोत्सव इस बात का साक्षी बना कि यदि श्रद्धा सच्ची हो, तो प्रभु अपने भक्तों के लिए स्वयं उत्सव का रूप धारण कर लेते हैं। 



 

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गुरु मंत्र
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